वरिष्ठ राकांपा नेता छगन भुजबल के बयान पर हंगामा...मुंबई को बताया सोने का अंडा देने वाली मुर्गी
Uproar over the statement of senior NCP leader Chhagan Bhujbal... told Mumbai the hen that lays the golden egg

विधानसभा में पूरक मांगों पर चर्चा के दौरान पूर्व मंत्री और वरिष्ठ राकांपा नेता छगन भुजबल के एक बयान से हंगामा हो गया और सदन का कामकाज दो बार रोकना पड़ा।
मुंबई : विधानसभा में पूरक मांगों पर चर्चा के दौरान पूर्व मंत्री और वरिष्ठ राकांपा नेता छगन भुजबल के एक बयान से हंगामा हो गया और सदन का कामकाज दो बार रोकना पड़ा।
बाद में विपक्ष के नेता अजीत पवार के भुजबल की तरफ से मांगी मांगने के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई। बुधवार को विधानसभा में वर्ष 2022-23 की पूरक मांगों में नगर विकास, लोक निर्माण, ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास विभाग की मांगों पर चर्चा हुई।
इस चर्चा में भाग लेते हुए भुजबल ने मुंबई की नागरिक समस्याओं को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा और मुंबई को सोने के अंडे देने वाली मुर्गी बताया।
भाजपा की मनीषा चौधरी, योगेश सागर और अन्य ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है, इसलिए मुंबई को सोने के अंडे देने वाली मुर्गी कहना मुंबईकरों का अपमान है और हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
चौधरी ने मांग की कि भुजबल को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए। इससे भुजबल क्रोधित हो गए और चौधरी से कहा कि बैठ जाओ। इससे भाजपा विधायकों का पारा और भी चढ़ गया। इस बीच अजित पवार ने भाजपा विधायकों की ओर इशारा करते हुए कहा कि भुजबल ने मुर्गी शब्द वापस ले लिया है। फिर भी भाजपा विधायक भुजबल के माफी मांगने पर अड़े रहे। बढ़ते हंगामे की वजह से सदन का काम 10 मिनट के लिए रोक देना पड़ा।
जब सदन का कामकाज फिर से शुरू हुआ तो योगेश सागर ने भुजबल को संबोधित करते हुए कहा कि आप सरस्वती, सावरकर और संतों का अपमान करते हैं। इसी मुंबई ने आपको मेयर से लेकर सारे पद दिए हैं। आप वरिष्ठ हैं, इसलिए नए सदस्यों का अपमान नहीं कर सकते।
आपको माफी मांगनी चाहिए। भुजबल ने इस मांग का जवाब देते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा जोतीराव फुले, सावित्रीबाई फुले का अपमान किया तो आप चुप क्यों रहे? भुजबल के इस वाक्य ने सत्ता पक्ष के गुस्से को और बढ़ा दिया।
अजीत पवार ने सभागृह का माहौल शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भुजबल ने केवल नीचे बैठ जाओ कहा, उनका किसी के अपमान का इरादा नहीं था। मुंबई सबकी है। मुंबई का अपमान कोई नहीं कर सकता। साथ ही स्थानीय निकाय संस्था में हमने सबसे पहले 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था।
यह आरक्षण बाद में 50 प्रतिशत हमने किया। हमने हमेशा से महिलाओं का सम्मान किया, लेकिन यदि किसी की भावना आहत हुई है तो मैं खेद व्यक्त करता हूं।
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