सुप्रीम कोर्ट ने एजेंट के वादों को लेकर एयरलाइंस पर सुनाया अहम फैसला...

Supreme Court gives important verdict on airlines regarding agent's promises...

सुप्रीम कोर्ट ने एजेंट के वादों को लेकर एयरलाइंस पर सुनाया अहम फैसला...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तय समय बीत गया और वास्तव में सामान डेढ़ महीने बाद पहुंचा तो यह सामान पहुंचाने में हुई लापरवाही पूर्ण देरी थी। कोर्ट ने कहा कि वह एनसीडीआरसी के फैसले में दखल देने का इच्छुक नहीं है और दोनों अपीलें खारिज कर दीं।

नई दिल्ली : ज्यादातर लोग जब हवाई मार्ग से सामान की खेप पहुंचाने के लिए बुकिंग करते हैं, तो एयरलाइंस के अधिकृत एजेंट के जरिए करते हैं और एजेंट द्वारा समान पहुंचाने के लिए दी गई समय सारिणी को ही सही मानते हैं, लेकिन कभी-कभी जब समान की खेप तय समय पर नहीं पहुंचती और देरी पर हुए नुकसान का हर्जाना मांगा जाता है तो एयरलाइंस यह कहते हुए मुकर जाती हैं कि दिखाओ मेरे साथ कौन सा एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें इस तय समय में समान पहुंचाने की बात थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में जो आदेश दिया है, उसके मुताबिक एयरलाइंस एजेंट द्वारा बुकिंग के समय दी गई समय सारिणी से नहीं मुकर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एयरलाइंस अपने एजेंट की ओर से किये गए वादे और दी गई समय-सारिणी से बंधी है।

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के समान पहुंचने में देरी पर 30 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को सही ठहराते हुए कुवैत एयरवेज अपील खारिज कर दी। यह मामला 1996 का है, जिसमें हस्तशिल्प का बहुत सारा सामान अमेरिका पहुंचना था।

Read More प्रभादेवी के सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर CM शिंदे का अहम ऐलान...

एयरलाइंस के ट्रैवल एजेंट ने बुकिंग करते वक्त सात दिनों में सामान की खेप पहुंचाने की समय सारिणी दी थी, जबकि सामान डेढ़ महीने बाद पहुंचा, जबकि सामान जल्दी पहुंचाने के लिए समुद्री मार्ग से 10 गुना अधिक भाड़ा देकर हवाई मार्ग से सामान भेजा गया।

Read More राज का अडानी के खिलाफ मोर्चे को लेकर सख्त टिप्पणी, अब क्यों जागे महाविकास आघाड़ी के नेता...

सामान समय पर न पहुंचने पर मैसर्स राजस्थान इम्पोरियम, जो कि विभिन्न देशों में हस्तशिल्प के सामानों का एक्सपोर्टर था, ने एनसीडीआरसी में शिकायत दाखिल कर मुआवजा दिलाने की मांग की थी। एनसीडीआरसी ने देरी से सामान पहुंचने पर हुए नुकसान के लिए नौ फीसद ब्याज के साथ 25 लाख रुपये और मानसिक पीड़ा व मुकदमा खर्च के लिए पांच लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ कुवैत एयरवेज ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी।

एनसीडीआरसी द्वारा तय मुआवजे को और बढ़ाने की मांग लेकर मैसर्स राजस्थान आर्ट इम्पोरियम ने भी अपील दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अपीलें खारिज कर दी हैं और एनसीडीआरसी के फैसले को सही ठहराया है। न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने एनसीडीआरसी के फैसले में दखल देने से इन्कार करते हुए गत 9 नवंबर को फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में प्रतिवादी कुवैत एयरवेज ने यह दलील नहीं दी है कि डग्गा एयर एजेंट्स उसका एजेंट नहीं है और न ही यह दलील दी है कि एजेंट ने एजेंसी के लिए तय शर्तों के बाहर जाकर काम किया है। कोर्ट ने कहा कि कॉन्ट्रेक्ट एक्ट 1972 की धारा 186 और 188 एजेंट को कानून सम्मत ढंग से जरूरी काम करने का अधिकार देती है।

Read More उद्धव ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के 'असली शिवसेना' वाले फैसले को दी चुनौती

कोर्ट ने कहा कि एयरलाइंस का यह कहना नहीं है कि डग्गा एयर एजेंट उसका एजेंट नहीं है और उसे सामान की खेप पहुंचाने की समय सारिणी देने का अधिकार नहीं था, ऐसे में एयरलाइंस जिम्मेदारी मुक्त नहीं होती। एयरलाइंस अपने एजेंट द्वारा सामान एक सप्ताह में पहुंचने के, किये गए वादे से बंधी है।

Read More सुप्रीम कोर्ट ने संदेशखालि में हुई हिंसा की अदालत की निगरानी में जांच कराने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तय समय बीत गया और वास्तव में सामान डेढ़ महीने बाद पहुंचा तो यह सामान पहुंचाने में हुई लापरवाही पूर्ण देरी थी। कोर्ट ने कहा कि वह एनसीडीआरसी के फैसले में दखल देने का इच्छुक नहीं है और दोनों अपीलें खारिज कर दीं।

Post Comment

Comment List

Advertisement

Sabri Human Welfare Foundation

Join Us on Social Media

Latest News

  जलगांव : हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई और 22 अन्य घायल जलगांव : हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई और 22 अन्य घायल
महाराष्ट्र के जलगांव के कन्नड़ घाट के निकट एक मंदिर के पास हुए हादसे में तीन लोगों की मौत हो...
सोलापुर में भूकंप के झटके; भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.6 रही
नई दिल्ली : मोदी, योगी को मारने की धमकी देने वाले को दो साल की जेल 
मुंबई: वक्फ (संशोधन) विधेयक असंवैधानिक और धार्मिक मामलों के प्रबंधन की समानता और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन - वारिस पठान
मुंबई : पत्नी को मेंटेनेंस न देने वाले पति को एक साल कारावास की सजा
मुंबई मालाबार हिल में सड़कों पर पार्किंग प्रतिबंध लागू; 
मुंबई : गरीब मुस्लिम को वक्फ से फायदा नहीं - वसीम खान

Advertisement

Sabri Human Welfare Foundation

Join Us on Social Media